सब कानुनोंका “बाप”कानून

`जनता की आवाज- पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)`

हम  इस कानून को सब कानुनोंका “बाप”केहते है,क्यूंकी ये आम नागरिक  को नये कानून लाने का,वर्तमान कानून  मे बदलाव लाने ,शिकायत करके वर्तमान सामस्यापे हल बतानेका हक और जरीया देता है.

आज यदि आप के यहाँ कोई भ्रष्ट मंत्री है और आप और लाखों लोग चाहते हों कि प्रधान मंत्री उसपर कार्यवाई करके उसको निकाल दे ,तो आप क्या करेंगे?

एक तरीका तो ये है कि आप या तो आंदोलन/धरना कर सकते हैं | मीडिया जो 80% बिका हुआ है आपका साथ नहीं देगा और पोलिस के डंडे भी खाना पड़ेगा वो अलग से| लाखों आम लोग पहले तो आपनी रोजी-रोटी त्याग कर धरना कर नहीं सकते,कुछ हज़ारो लोग आयेंगे लेकिन कुछ दिनों बाद वे भी लौट जाएँगे और पोलिस की मार लोगों की संख्या जो धरने पर हैं को और कम कर देगी |

दूसरा तरीका ये कि आप प्रधान मंत्री को पत्र लिखें लेकिन चूँकि प्रधानमंत्री,अफसर आदि क्योंकि भ्रष्ट होते हैं ,वे `बोलेंगे कि पत्र मिला नहीं `या उसमें जो लिखा हुआ है उसको आसानी से छेड़छाड़ कर सकते हैं| यदि लाखों करोड़ों लोग हस्ताक्षर अभियान भी चलायें,प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री हस्ताक्षरों को `जाली` करार कर उसको अविश्वसनीय कह देते हैं (इसका कारण ये है कि हमारे देश में नागरिकों के सही का सरकार के पास कोई  रिकार्ड नहीं है ताकि उनकी जांच की जा सके)और उसको दबा देते  हैं | पोलिस अक्सरवाले एफ.आई.आर भी नहीं लिखते क्योंकि मंत्री की उनके साथ पहचान आम नागरिक से कहीं ज्यादा होती है |

लेकिन जनता की आवाज़/पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली के अनुसार,यदि आपको मंत्री के विरुद्ध शिकायत है तो आपको कलेक्टर के दफ्तर जाना होगा,वहाँ क्लर्क उसको स्कैन कर लेगा| एक-एक शब्द प्रधानमन्त्री के वेबसाइट पर आ जायेगा | अब क्योंकि पूरे विश्व में लाखों-करोड़ों लोग इस वेबसाइट को देख सकते हैं चौबीसों घंटा तो इसके साथ छेड़छाड़ करना असंभव है| और लाखों-करोडों समर्थक पटवारी के दफ्तर जाकर आपकी उस खरी शिकायत का समर्थन कर सकते हैं और जांच के दृष्टि से उनका वोटर आई.डी के विवरण और अँगुलियों की छाप ली जायेगी और ये सब जानकारी प्रधान मंत्री के वेबसाइट पर जाएँगे| इस तरह शिकायत के समर्थकों की संख्या को अविश्वसनीय नहीं कहा जा सकता बल्कि इस प्रकार से पारदर्शी शिकायत करने पर समाचार पत्र और टी. वी चैनल भी इसको नज़रअंदाज नहीं कर सकते,अन्यथा उनकी ही विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लोग करेंगे,इसीलिए उनको ये समाचार देना होगा और ये शिकायत देश के कोने कोने तक पहुँच जायेगा और शिकायत के समर्थक देशभर के सांसद और अन्य जानी-मानी हस्तियों को बार-बार प्रश्न करेंगे कि उस सच्ची शिकायत का क्या हुआ और नाक में दम कर देंगे ? सांसद भी शिकायत को नजरंदाज नहीं कर सकेंगे क्योंकि इसका प्रमाण रहेगा कि लाखों-करोड़ों व्यक्ति उस शिकायत का समर्थन कर रहे हैं और ये बात कभी भी जाँची जा सकती है,किसी के द्वारा क्योकि वेबसाइट पर समर्थकों के अंगुली के छाप और वोटर आई.डी के विवरण तो रहेंगे | इस प्रकार सांसदों पर दबाव पड़ेगा और सांसदों के द्वारा प्रधान मंत्री पर | ऐसे में प्रधानमन्त्री को कार्यवाई करनी ही होगी और यदि शिकायत सही पायी गयी तो मंत्री को निकालना होगा|

इस प्रकार से डाली गयी शिकायत / प्रस्ताव / सुझाव जो लाखों-करोडों द्वारा समर्थित है को दबाना असंभव है और नेता,अफसर पर जनता का दबाव द्वारा जनता अपना कहा मनवा सकती है | लाखों-करोड़ों समर्थकों के हर व्यक्ति को मालूम रहेगा और देख भी दकेगा कि उसके साथ लाखों-करोड़ों व्यक्ति है और इससे उसको और शिकायत को बल मिलेगा |

इस सिस्टम के आने से हर नागरिक एक रिपोर्टर बन सकता है और कोई समाचार दे सकता है और दूसरे नागरिक इसको पढकर और समर्थन दे कर इसको फैला सकते है जिससे सही ,निष्पक्ष और विश्वनीय समाचार अधिक आयेंगे जबकि आज मीडिया समाचार पक्षीय और झूटे समाचार  देती है| आज मीडिया वो ही समाचार देती है जिसके लिए उसको पैसे दिए जाता हैं या उसके समर्थक और उनको पूंजी देने वाले बहु-राष्ट्रिय कंपनी वर्ग के हित के हों |

 

राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रस्‍तावित `जनता की आवाज- पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)`-सरकारी अधिसूचना(आदेश) का क़ानून-ड्राफ्ट

 

प्रस्तावित `जनता की आवाज- पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)  –सरकारी अधिसूचना में नीचे दिए अनुसार केवल तीन खण्‍ड हैं। कृपया ध्‍यान दें कि तीसरा खंड महज एक घोषणा है। इसलिए इस प्रस्‍तावित `जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली` सरकारी अधिसूचना में लागू करने के लिए केवल दो ही क्रियाशील खण्‍ड हैं।

पटवारी कौन है ?

पटवारी गांव का अधिकारी है जो भूमि/जमीन का रिकार्ड रखता है| 2-3 गांव के बीच ,एक पटवारी होता है और कुछ शहरों में ,पटवारी के बदले `नागरिक केन्द्र क्लर्क` होता है 2-3 वार्ड के बीच में | इस प्रकार,आप निर्णय कर सकते हैं `पटवारी` का नाम स्थानीय भाषा में और अपने राज्य में | पटवारी के कुछ अन्य पर्याय हैं- तलाटी ,ग्राम अधिकारी ,लेखपाल|

हम सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध करते है कि वे प्रधानमंत्री पर निम्नलिखित अधिसूचना पर हस्ताक्षर करने का दबाव डालें:

 

#अधिकारी प्रक्रिया
1कलेक्टर

(अथवा उसका क्‍लर्क)

राष्ट्रपति कलक्टर को आदेश दें कि:यदि कोई भी नागरिक मतदाता अपने जिले में कोई सूचना का अधिकार आवेदन पत्र प्रस्‍तुत करता है अथवा किसी भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करता है या कलेक्टर को कोई शपथपत्र/एफिडेविट/हलफनामा देता है और प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर इसे डालने का अनुरोध करता है तो वह कलेक्टर या उसके द्वारा नामित क्लर्क एक सीरियल नंबर जारी करेगा और उस पत्र आदि को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर 20 रूपए प्रति पेज/पृष्‍ठ का शुल्क लेकर डाल देगा।  
2तलाटी, पटवारी, ग्राम अधिकारी/लेखपाल (अथवा उसका क्‍लर्क)2.1) राष्ट्रपति पटवारी को आदेश दें कि:यदि कोई भी नागरिक मतदाता अपने वोटर आईडी / मतदाता पहचान पत्र के साथ आये और सूचना का अधिकार आवेदन पत्र पर अपनी हाँ / ना दर्ज कराए अथवा धारा 1 में शिकायत अथवा कोई एफिडेविट/हलफनामा दर्ज कराए तब पटवारी प्रधानमंत्री जी वेबसाइट पर उसकी हाँ या ना उसके वोटर आई कार्ड (संख्‍या) के साथ दर्ज करे और 3 रूपए के शुल्क के बदले एक छपा हुआ (प्रिंटेड) रसीद  दे। ।

2.2)पटवारी नागरिकों को यह अनुमति भी दे कि वे अपनी हाँ या ना 3 रूपए के शुल्‍क देकर बदल सकते हैं।

2.3)गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले/बी पी एल कार्डधारकों के लिए शुल्‍क एक रूपए होगा।

3( सभी नागरिकों, अधिकारियों, मंत्रियों के लिए)यह ‘जनता की आवाज`-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) कोई जनमत संग्रह प्रक्रिया नहीं है। हाँ या ना की यह गिनती प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री,अधिकारियों,जजों आदि के लिए कोई बाध्‍य / बंधनकारी  नहीं होगा । यदि 37 करोड़ से अधिक महिला मतदाता, दलित मतदाता,वरिष्‍ठ नागरिक मतदाता या गरीब मतदाता या किसान मतदाता या 37 करोड़ भारतीय मतदाताओं में से कोई भी नागरिक मतदाता किसी दिए गए एफिडेविट पर हाँ दर्ज करे,तब प्रधानमंत्री उस सूचना का अधिकार आवेदन पत्र के एफिडेविट पर आवश्‍यक कार्रवाई कर सकता है अथवा उसे ऐसी कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है ; अथवा प्रधान मंत्री इस्‍तीफा दे भी सकता है या उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।

 

हम `जनता की आवाज`-पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) कानून का सार इस प्रकार प्रस्‍तुत करते है:-

  • यदि कोई नागरिक चाहे तो कलेक्टर/जिलाधिकारी (डी एम) के कार्यालय में जाकर प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर सूचना का अधिकार आवेदनपत्र डाल सकता है।
  • यदि कोई नागरिक किसी आवेदनपत्र या शिकायत अदि को समर्थन करना चाहे तो वह तलाटी (पटवारी अदि) के कार्यालय में जाकर 3 रूपए शुल्क देकर प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर अपना समर्थन दर्ज कर सकता है।

तीन पंक्‍ति/लाइन का यह प्रस्‍तावित जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) `  कानून गरीबी और भ्रष्‍टाचार को केवल चार महीनों में ही कम कर देगा !!

 

`जनता की आवाज- पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)` के बारेमे कुछ प्रश्न

 

प्रश्न-1:क्या भारत में सभी नागरिकों के पास इस सरकारी अधिसूचना का उपयोग करने के लिए इन्टरनेट है?

ये सबसे आम,लेकिन गलत प्रश्‍न है जिसका सामना हम प्रस्तावित जनता की आवाज (पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)) पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली- सरकारी अधिसूचना  पर करते है। हम इसे गलत प्रश्‍न कहते है क्योंकि प्रस्तावित कानून का प्रयोग शुरू करने के लिए नागरिकों को इन्टरनेट कनेक्शन की जरुरत बिलकुल नहीं पड़ती। चाहे नागरिकों के पास इन्टरनेट हो या नहीं ,उन्हें कलेक्टर के कार्यालय में स्‍वयं जा कर ही अपनी शिकायत अथवा सूचना का अधिकार आवेदनपत्र जमा करना होगा। और चाहे उनके पास इन्टरनेट कनेक्‍शन हो या नहीं ,उन्हें तलाटी (लेखपाल,पटवारी,ग्राम-अधिकारी) के कार्यालय में स्‍वयं जा कर ही किसी शिकायत अथवा शपथपत्र/एफिडेविट पर हाँ दर्ज करना होगा। इसलिए इस कानून का उपयोग करने के लिए किसी नागरिक के पास इंटरनेट की बिलकुल आवश्‍यक्‍ता नहीं है। और यदि किसी व्‍यक्‍ति के पास इन्टरनेट है तो इससे कोई फर्क नही पड़ेगा। इसलिए इस कानून का उपयोग भारत के सभी नागरिक मतदाता कर सकते हैं । यदि उसके पास इन्टरनेट है तो वो शपथपत्र/एफिडेविट को सुगमता/आसानी से पढ़ सकते हैं। लेकिन बिना इंटरनेट वाला व्‍यक्‍ति भी ऐसा कर सकता है –उसे केवल किसी ऐसे व्‍यक्‍ति से कहने की जरूरत है जिसके पास इन्टरनेट कनेक्‍शन है।

 

प्रश्न-2:क्या धनिक / विशिष्ट वर्ग मत / अनुमोदन / स्वीकृति को पैसे,गुंडे या अन्य तरीके से प्रभावित नहीं करेंगे?

खंड / धारा-2 प्रस्तावित सरकारी अधिसूचना `जनता की आवाज़ पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली` का कहता हैं कि कोई भी नागरिक खंड/धारा-1 अनुसार दर्ज किये गए शिकायत/प्रस्ताव पर हाँ/न दर्ज कर सकता है और वो पारदर्शी होगा |लेकिन कोई भी विशिष्ट वर्ग/धनिक 100 करोड़ खर्च कर सकता है और 1 करोड़ लोगों को हाँ दर्ज करने के लिए नहीं बोल सकता है? देखिये,कृपया धारा-2.2 भी पढिये| नागरिक किसी भी दिन अपनी हाँ/ना बदल सकता है | तो यदि करोड़ों नागरिकों को `हाँ `दर्ज करने के लिए पैसे मिले हैं ,तो अगले दिन ही वे `हाँ` को `ना` में बदलने के लिए धमकी दे सकते हैं | अभी कोई भी करोड़ों नागरिकों को नियंत्रित नहीं कर सकता एक सप्ताह के लिय भी पूरी सेना के साथ भी | तो धनिक/विशिष्ट वर्ग को रोज रु.100 करोड़ खर्च करना पड़ेगा और कुछ ही हफ़्तों या महीनों में धनिक के सारे पैसे समाप्त हो जाएँगे | भारत के सारे धनिक मिलकर भी करोड़ों नागरिकों को खरीद नहीं सकते इस प्रक्रिया के चलते | इसिलिय खंड/धारा-2.2 ये सुनिश्चित करता है कि ये प्रक्रिया धन-शक्ति,गुंडा-शक्ति या मीडिया-शक्ति से प्रभावित नहीं होगा |

 

‘जनता की आवाज `-पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) का एक लाइन में सार

 

‘जनता की आवाज-पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम) का एक लाइन में सार इस प्रकार है —यदि कोई नागरिक चाहे तो कलेक्टर, जनता की शिकायत / प्रस्ताव / सुझाव को, शुल्‍क / फीस लेकर प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर डाल देगा।

शब्‍द ‘सूचना का अधिकार आवेदन पत्र,भ्रष्‍टाचार के विरूद्ध शिकायत,कोई शपथपत्र’ केवल शिकायत शब्‍द को ही दोहराता है। और शिकायत पर हाँ दर्ज कराने की नागरिक को अनुमति / परमिशन देना केवल इसलिए है कि यदि दस हजार नागरिकों की शिकायत एक ही है तो सभी दस हजार लोगों को कलेक्टर के कार्यालय में जाने और प्रति पेज/पृष्‍ठ 20 रूपए का भुगतान करने की आवश्‍यकता नहीं है —केवल एक व्‍यक्‍ति को कलेक्टर के कार्यालय में जाने की जरुरत होगी और शेष व्‍यक्‍ति उसी शिकायत को स्‍थानीय तलाटी अथवा पटवारी के कार्यालय में मात्र 3 रूपए का भुगतान करके जमा कर सकते हैं। इस तरह धारा 3,धारा 1 का मात्र पुन:कथन / दोहराना है। और प्रधानमंत्री की वेवसाइट पर जवाब डालना फिर से खण्‍ड/धारा 1 का पुनर्कथन / दोहराना है ।

 

ये तीन लाइन का सरकारी आदेश आम जनता को पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव / सुझाव डालने का अधिकार देगा

 

`पारदर्शी` को हम परिभाषित करेंगे कि वो शिकायत / प्रस्ताव / सुझाव जो कभी भी ,कहीं भी और किसी के भी द्वारा दृश्य हो और जाँची जा सके ,ताकि कोई भी नेता ,कोई भी बाबू ,कोई भी जज ,मीडिया उसे दबा न सके |

हम ये बताते है कि क्यों कुछ लोग `जनता की आवाज़-पारदर्शी शिकायत प्रणाली(सिस्टम)` का विरोध करते हैं| वो इसीलिए कि `पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली` हम आम नागरिकों को दूसरे नागरिकों के समक्ष अपने विचार रखने देता है ,मीडिया और विशिष्टवर्ग के लोगों को दरकिनार/बाई-पास कर के | ये हमारी एकता को साबित करने की क्षमता को मजबूत करेगा ,जब हम एक हों,और विशिष्ट वर्ग के लोगों को “ हम आम नागरिकों में बटवारा/विभाजन की गलत धारणा/गलत-फहमी पैदा व हम आम नागरिकों पर शाशन करने ” करने की क्षमता को कम करेगा | `पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली` दलितों,गरीबों,महिलाएं ,किसान,मजदूर,आदि को अपनी शिकायत पारदर्शी तरीके (जो हमेशा जाँची और देखी जा सके) से,प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखने देता है | और इसीलिए दलित-विरोधी,गरीब-विरोधी,मैला-विरोधी,किसान-विरोधी,मजदूर-विरोधी,इस प्रस्तावित `पारदर्शी शिकायत प्रणाली (सिस्टम)` सरकारी अधिसूचना के क़ानून-ड्राफ्ट से नफरत करते हैं |

 

पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए www.righttorecall.info/004.h.pdf पर देखें|

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