भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता,भा. स्वा. ट्रस्ट,स्वामी जी का नाम और भारत को नष्ट कर देंगे

भूमिका-

जनवरी सन 2009 में भारत स्वाभिमान के स्थापना के दिन से ही मैं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं को निवेदन कर रहा हूँ कि भारत कि वर्तमान कानून और विश्व के कानूनों को पढ़िए इसके साथ वर्तमान,प्राचीन या अन्य कार्यकर्ताओं के द्वारा दिए गए कानून को पढ़िए और इसे अन्य सदस्य ,जिला या राज्य प्रभारी एवं स्वामी रामदेव जी तक पहुचाइएं | कुछ कार्यकर्ताओं ने इस पर अमल भी किया है | परन्तु अधिकतर कार्यकर्ताओं ने सच्चाई जानने के लिए प्रयत्न करने और कानून पढ़ने से इनकार कर दिया है और जोर डाल रहे हैं कि हमें केवल नारेबाजी,सदस्य जोड़ो अभियान और अन्य ऐसे कार्यों ,जिससे देश को कोई लाभ नहीं होगा, में ही लगना है |

 

मुस्लिम दलितऔर ईसाई दलितके लिए आरक्षण की मांग बिलकुल गलत है क्योंकि ईसाईयों और मुसलमानों में कोई दलित ही नहीं होता है | इन्हें `भूतपूर्व दलित` कहना अधिक सही रहेगा और ये ही शब्द का प्रयोग मैं करता हूँ | हिंदुओं में दलितों को लेकर काफी पक्षपात होता है परन्तु जो ईसाई या मुसलमान में `भूतपूर्व दलित` है उनमें पक्षपात नहीं होता |

जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण कारण है जिसके लिए मैं उन लोगों को कानून और प्रस्तावित कानून पढ़ने को कहता हूँ वो यह है कि कोई व्यक्ति चाहे वो कितना महान क्यों न हो उसके पास केवल दिन में 24 घंटे ही होते हैं | और यदि स्वामी जी के आस-पास में रहने वाली व्यक्ति यदि अपना दिमाग का प्रयोग नहीं करेंगे,तो एक दिमाग 24 घंटे से अधिक कार्य नहीं कर सकता | और भारत के शत्रू जैसे बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ (MNCs) और ईसाई धर्म प्रचारक,जिनका कार्य कम केन्द्रीयकृत व्यस्था से चलता है ,वे आसानी से जाल बिछाकर हमें हरा सकते हैं |

 

भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओं के ऐसे रुख के कारण,स्वामी रामदेव जी अधूरी जानकारी के कारण,धूर्त व्यक्ति जैसे अन्ना हजारे कि जाल में फंस गए और उन्हें मुस्लिम और ईसाई `भूतपूर्व दलितों` के आरक्षण की बात को कहा | और इससे असली लाभ ईसाई धर्म-प्रचारकों को ही होगा,मुसलमानों को नहीं | और यदि नया कानून बनता है तो एक भी मुस्लिम दलित को इससे लाभ नहीं मिलेगा | तब अधिकतर मुसलमान `भूतपूर्व दलित` ईसाई धर्म-प्रचारकों के धर्म-परिवर्तन के जाल में फस जाएँगे |

 

भारत की जनसँख्या 121 करोड़ है और इनमें से 20 करोड़ हिंदू दलित हैं,कुछ 20 करोड़ मुसलमान हैं जिनमे से कुछ 10 करोड़ “मुस्लिम दलित” है | यदि आरक्षण को मुस्लिम `भूतपूर्व दलितों` के लिए बढ़ाया जाता है तो इससे दलितों के लिए आरक्षण 14% से 20% से 24% तक बढ़ जायेगा | और यदि एक बार आरक्षण ईसाई-दलित को मिलने लगा तो 5 या 10 वर्ष के अंदर ही दलितों के 70% से 80% दलित ईसाई धर्म-प्रचारकों के जाल में फस जाएँगे |

 

आरक्षण केवल शीर्ष के 1% दलितों हो मिलता है और बहुत सारे शीर्ष के दलित धर्म-परिवर्तन का विरोध करते हैं क्योंकि उनको आरक्षण का लाभ मिलना बंद हो जायेगा | लेकिन जब मुसलमान और ईसाई `भूतपूर्व दलितों` के लिए आरक्षण मिलना शुरू हो जायेगा ,तो इनके ईसाई धर्म-प्रचारकों द्वारा धर्म-परिवर्तन करने से रोकने के लिए कुछ नहीं होगा | और इन शीर्ष के दलित के धर्म-परिवर्तन के साथ ही उनसे जुड़े और उनपर निर्भर हजारों निचले स्तर के दलित भी धर्म-परिवतन मजबूरी में करेंगे |

 

आज से लगभग 8 वर्ष पहले पूर्व पोप जब भारत आया था तो कहा था “हम चाहते है कि पूरा एशिया ईसाई हो जाए” इसका अर्थ यही हुआ कि वे कह रहे थे “हम एशिया से हिंदुत्व और इस्लाम को समाप्त कर देना कहते है” और यदि भारत में ईसाई `भूतपूर्व दलितों ` को आरक्षण मिल गया तो इससे यह काम बहुत जल्द हो जाएगा |

 

अभी कोंग्रेस और सोनिया गाँधी मुस्लिम `भूतपूर्व दलित` और ईसाई `भूतपूर्व दलित` के आरक्षण को लागू करने के लिए बहुत प्रयास कर रहे हैं और इसी तरह मनमोहन,दिग्विजय,नितीश कुमार,लालू यादव,करात,येचुरी,मुलायम यादव अन्य भी इसका प्रयास कर रहे हैं | आखिर धर्म-प्रचारक इन लोगों को हजारों करोड़ों रूपए का रिश्वत जो देते हैं ताकि ईसाई `भूतपूर्व दलितों` को आरक्षण जो मिल जाए | इसके लिए तो वे स्वामी रामदेव जी को भी श्रेय देंगे !! क्यों नहीं ?? यही तो कोंग्रेस और मार्क्सवादी पार्टी करना चाहते थे जब से वे मई-2004 से सत्ता में आये थे ,परन्तु मांग नहीं कर पा रहे थे,राष्ट्रवादियों के विरोध के भय से | परन्तु जब अभी राष्ट्रवादियों ने कानून पढ़ने से मुह मोड़ लिया है और नए कानून से देश में क्या असर होगा इससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता | तो यह कोंग्रेस के बहुत अच्छा अवसर है ऐसे कानूनों को पास करने के लिए |

 

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मैं इस समस्या के लिए क्या समाधान प्रस्तुत करता हूँ ?

 

क्या इस नुकसान की भरपाई हो सकती है ? मेरे राय से हाँ हो सकती है | भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओं को कानून-ड्राफ्ट को और आरक्षण की समस्या कम करने के लिए प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट और देश की अन्य समस्याओं को कम करने के लिए क़ानून-ड्राफ्ट को पढ़ना शुरू कर देना होगा और निर्णय लेना होगा कि कौन सा प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट देश के लिए अच्छा है और उन प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को अपने अन्य कार्यकर्ताओं को,जिला या राज्य प्रभारी या स्वामी जी को इन क़ानून-प्रक्रियाओं के बारे में बताएं | या समाचार-पत्र में अपने पसंद के प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट का विज्ञापन भी दे सकते है और प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को अपने घोषणा-पत्र में डाल सकते हैं |

 

अधिकतर कार्यकर्ता मुझसे पूछते हैं कि मैं स्वामी जी से क्यों नहीं मिलता ? इसके कई कारण हैं कि मैं अहमदाबाद से बहार क्यों नहीं जा सकता | मार्च 2009 से मैं अधिकतर 100 दिन ही अहमदाबाद से बहार रहा हूँ,जिसमें फ़रवरी-मार्च 2000 में अमरीका में बिताए हुए 60 दिन भी शामिल हैं | और मैं चुनाव का उम्मीदवार भी हूँ ,जिसकी कुछ सीमाएं होती हैं | चुनावी उम्मीदवार अपने विचार दूसरे संगठनों में प्रचार कर सकता है | परन्तु यदि कोई चुनाव-उम्मीदवार नहीं है तो उसकी कोई सीमा बंधन नहीं है वह कहीं भी जाकर अपनी बात को रख सकता है |

 

तो अब यह भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओं पर है कि वो क्या करें | आप निर्णय लीजिए कि आप मुस्लिम `भूतपूर्व दलित`,ईसाई `भूतपूर्व दलित` के आरक्षण को समर्थन करना चाहते हैं या विरोध | यदि आप समर्थन करना चाहते है तो ठीक है | परन्तु यदि आप देश के हित में कार्य करना चाहते हैं तो मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ कि कृपया आरक्षण की समस्या और देश की दूसरे समस्याओं को कम करने के लिए प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को पढ़ना शुरू कीजिये और समाचार-पत्र में आपके पसंद के प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट का विज्ञापन भी दीजिए |

 

आरक्षण की समस्या और देश की दूसरे समस्याओं को कम करने के लिए प्रस्तावित क़ानून-ड्राफ्ट  www.righttorecall.info/301.h.pdf विशेषकर चैप्टर 1,5,30,36 में दिए गए हैं  |

राहुल चिमनभाई मेहता द्वारा रचित |

Original Post by Rahul Chimabbhai Mehta:

https://www.facebook.com/groups/rrgindia/doc/363170727065708/

Translate post by Anil Shaw:

https://www.facebook.com/groups/rrgindia/doc/363129933736454/

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