भारत का सबसे अमीर वर्ग की गलतफहमी

भारत का सबसे अमीर वर्ग की गलतफहमी “आम-नागरिक-समर्थक सामान्य कानूनों का विरोध कर के”

भारत बहुराष्ट्रीय कंपनी का दास या गुलाम बनने की राह पर हे.

बहुराष्ट्रीय कंपनी ५०% या आधी तो कामयाब (सफल) हो गयी हे. बहुराष्ट्रीय कंपनी ने पूरी तरह से भारत प्रौद्योगिकी क्षेत्र में पूरा,कृषि या खेती में आधा एवम रक्षा,सैन्य और युद्ध क्षेत्र में पूरा अपने ऊपर आश्रित या आधीन कर लिया हे.

भारत में पैसेवाला बहुमत वर्ग आम नागरिको का अहित करने वाले कानूनों जेसे की पारदर्शी सिकायत प्रणाली के बिना जन-लोकपाल का का समर्थन करके तथा भ्रष्ट अधिकारी को नौकरी में से निकालने का प्रक्रिया (राइट टू रिकोल) का विरोध करके,कोर्ट,न्यायतंत्र या न्यायलय में आम नागरिको द्वारा भ्रष्ट को सजा देने का अधिकार (ज्यूरी सिस्टम) में का विरोध करके बहुराष्ट्रीय कंपनी की यह दासता (गुलामी) आगे बढा रहे हे.

हमें मानते हे की भारत में उपरका ५% पतिशत पैसेवाला बहुमत वर्ग यह सब भारत के गरीब लोगो को दबाकर रखने के लिए कर रहा हे जिससे उन पैसे वाले लोगो को सस्ते दाम पर काम या नौकरी करने वाले लोग मिले और उन्का शोषण कर सके जिससे उनकी आने वाली पुस्ते आराम से या राजा साही से जी सके. लेकिन पैसेवाला बहुमत वर्ग की यह शोच एक दम गलत हे.

हमें पैसेवाला बहुमत वर्ग की मिथ्या-बुद्धि को जूठ साबित करना हे. चलिए दो स्थितियों के बारेमे बात करते हे

(१) अगर भारत में उपरका ५% पतिशत पैसेवाला बहुमत वर्ग आम नागरिक के हित करने वाले कानूनों का समर्थन करे

इस परिस्थिति में भारत के सामान्य नागरिको के पर शक्ति आ जायेगी और भ्रस्टाचार तथा गरीबी नाबूद हो जायेगी. इस परिस्थिति में पैसेवाला बहुमत वर्ग को कुछ भी खोना नहीं पड़ेगा. उनकी जीवन शैली वेसी ही रहेगी. कोई भी पैसेवाला गरीब लोगो का शोषण किये बिना भी अपनी समृद्ध जीवन शैली जी सकता हे. अंबानी सात माले के अपने महेल में ही रहेंगे सिर्फ उनको थोडा सा ही टेक्स ज्यादा देना पड़ेगा क्युकी वेल्थ टेक्स तथा एम.आर.सी.एम. के कानून आ जायेगा. उनको बडी आसानी से नौकरी करने वाले लोग मिल जायेंगे सिर्फ अंतर यही होगा की वो इतना सस्ता नहीं होगा. ज्यूरी सिस्टम तथा राईट टू रिकोल न्यायाधीश,मंत्रियो,पुलिस पर आने से सिर्फ हालत में कुछ शुधारा होगा तथा कोर्ट के हालत अच्छी होगी. वो सिर्फ आम नागरिको का शोषण नहीं कर पाएंगे लेकिन उनकी अमीरी में कोई फरग नहीं पड़ेगा.

(२) अगर भारत में उपरका ५% पतिशत पैसेवाला बहुमत वर्ग आम नागरिक के हित करने वाले का सक्रिय/निष्क्रिय कानूनों का समर्थन नहीं करेगा और बहुराष्ट्रीय कंपनीओ द्वारा हो रही लूंट को देखता रहेगा तो भारत बहुराष्ट्रीय कंपनीओ की गुलाम हो जायेगी

भारत फिर से गुलाम हो जायेगा. बहुराष्ट्रीय कंपनी ब्रिटीसर की तरह ही भारत को लुटेगी. गरीब आर गरीब होगा. लाखो लोग मर जायेंगे. बादमे यह बहुराष्ट्रीय कंपनी बहुसंख्य अमिर लोगो को भी नहीं छोडेगी. बहुराष्ट्रीय कंपनी बहुसंख्य अमिर लोगो की कोई सगी नहीं हे की उनको छोड़ दे. अगर भारत फिर से बहुराष्ट्रीय कंपनीओ का गुलाम बन गया तो वो किसी भी समय अंबानी की सात माले के महल छीन शक्ति हे और वो अंबानी को मजबूर करेगी की उनको ज्यादा टैक्स भरना पड़े. पैसा ही अपराधियों तथा बहुराष्ट्रीय कंपनी का जाति या धर्म हे.

भारत में रोजगार मिलना बिलकुल काम हो जायेगा. अराजकता में इतनी वृद्धि होगी की ईमानदार व्यक्ति नहीं मिलेगा,कोर्ट तथा पुलिस बहुराष्ट्रीय कंपनी की गुलाम बनकर कुछ कानून और व्यवस्था संभाल नहीं पाएगी. सब जगह गुंडा-राज होगा और पैसे वाले कोगो को ही उसमे ज्यादा भुगतना पड़ेगा क्युकी उनके पास पैसा हे

इसी तरह नागरिक-समर्थक सामान्य कानूनों का विरोध करके,भारत के पैसे वाले लोग बहुराष्ट्रीय कंपनीओ के दोस्त बन रहे हे. लेकिन यह दोस्ती ज्यादा नहीं चलेगी. जेसे ही बहुराष्ट्रीय कंपनीओ के पास पुलिस तथा कोर्ट पे नियंत्रण आ जायेगा तो इन पैसे वाले लोगो को क्या लगता हे की उनकी दोस्ती सात पुस्तो तक चलती रहेगी ? क्या यह पैसे वाले लोग बहुराष्ट्रीय कंपनीओ को खुदको लूटने से बचा पाएँगे ? क्या सोनिया गाँधी के खानदान के अलावा कोई बच पाएगा ? कोइया,पाकिस्तान,अफगानिस्तान,फिलिपाईन्स,इराक इसके जिवंत उदाहरण हे जहा पे इस बहुराष्ट्रीय कंपनीओ अमीर तथा गरीब किसी वर्ग के लोगो को नहीं छोड़ा.

पेहले ब्रिटीसरोने फूट डालो और राज करो की निति अपनाई,अभी यह बहुराष्ट्रीय कंपनी भारत के अमिर तथा गरीब वर्ग के बीचमे वोही निति अपना रहे हे

अभी यह भारत के अमीर लोगो पर हे की वो कोनसी परिस्थिति देखना चाहते हे तथा वो आम-नागरिक-समर्थक सामान्य कानूनों जेसे की पारदर्शी सिकायत प्रणाली (http://www.righttorecall.info/001.pdf),एम.आर.सी.एम.,राईट टू रिकोल,ज्यूरी सिस्टम (chapters 5,6,7,21 of http://www.righttorecall.info/301.pdf) का विरोध या समर्थन करते हे

टिप्पणीनोट – हमें कोई भी अमीर से किसी भी प्रकार के दान की आवस्यकता नहीं हे. सिर्फ आप लोगो का समय चाहिए ये सब कानूनों का प्रचार करने के लिए. हम शख्त तरीके से दान के खिलाफ हे.

कृपया आप अपनी राय हमारी फोरम याने की वार्तालाप करने के लिए मंच पर दे.

http://www.forum.righttorecall.info/viewtopic.php?f=2&t=263

 

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