जनलोकपाल को नागरिकों द्वारा निकाले जाने का अधिकार (right to recall) अनिवार्य क्यों है ?

1. जनलोकपाल क्या है ? और नागरिकों द्वारा निकाले जाने का अधिकार (right to recall) अनिवार्य क्यों है ?

 

जनलोकपाल बिल श्री अन्ना हज़ारे जी द्वारा प्रस्तावित कानून है | ये कानून 40 पृष्ठों का है और इस लिंक पे दिया गया है -

http://www.lokpalbillconsultation.org/docs/lokpalbill2_2.pdf

 

यह बिल एक चयन समिति का गठन करेगा (धारा 6 को देखें),जिसमे प्रधानमंत्री,नेता विपक्ष,2 उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, दो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और 2-4 अधिक गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे | ये चयन समिति एक खोज समिति (search committee) का गठन करेगी जो ऐसे 33 लोगों को चुनेगी जिन्हें वे उच्चे चरित्र वाला समझते हैं |

 

इसके बाद चयन समिति इन 33 लोगो से 11 का चुनाव करेगी लोकपाल के पद के लिए | इन 11 लोकपालों के पास किसी भी  केन्द्रीय सरकार के कार्यालय पदाधिकारी, सांसद,मंत्री,उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति,सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति आदि की जांच और गिरफ्तारी करवाने का अधिकार होगा | और ऐसा करने से भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा ! लेकिन अगर ये लोकपाल खुद भ्रष्ट हो गए तो ? इसीलिए हमें अन्ना जी के जनलोकपाल का समर्थन  नागरिकों द्वारा निकाले जाने के अधिकार (right to recall) के प्रावधानों के साथ करना चाहिए |

 

ये निकलने का अधिकार (Right to Recall) क्या है ?

 

हाँ,तो सोचिये की आपके पास एक फैक्ट्री है जिसमे 100 मजदूर काम करते हैं | मान लीजिये के सरकार ने ऐसा कानून बना दिया की आप किसी मजदूर को 5 या 10 साल तक निकल नहीं सकते | क्या लगता है वे मजदुर अनुशासन बनाये रखेंगे या ज्यादा से ज्यादा मनमानी करने लगेंगे ? स्पष्ट है की अनुशासनहीनता बढ़ेगी | निरंकुश नौकरी की सुरक्षा से कोई भी कार्यप्रणाली चौपट हो सकती है | इसी तरह,हम भारत के नागरिक 11 लोकपालों को परोक्ष रूप से नियुक्त कर रहे हैं और अगर हम उन्हें निष्काषित नहीं कर सकते,किस एक लोकपाल को भी,तो वे भी ज्यादातर उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीशों,ज्यादातर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों,मंत्रियों,आईएएस (IAS),आईपीएस (IPS) आदि की तरह भ्रष्ट हो सकते हैं | लेकिन निकालने के अधिकार के प्रावधानों से हम नागरिक एक या ज्यादा लोकपालों को निष्कासित कर पाएंगे |

 

अन्ना जी को गुमराह किया गया है की नवीनतम लोकपाल बिल में निकालने का अधिकार (Right to Recall) के प्रावधान हैं | इसलिए हम सबको अन्ना जी तक ये बात पहुचानी है की  ऐसा नहीं है,और हमें उनसे अनुरोध करना चाहिए की वे लोकपाल को नागरिको द्वारा निकालने के अधिकार (Right to Recall –Lokpal) के प्रावधानों को जनलोकपाल के आखिरी मसौदे में जोड़ दें |

 

बल्कि निकालने के अधिकार के बिना लोकपालों का बनना हम नागरिकों पे भरी पड़ सकता है | कैसे ? बहुराष्ट्रीय कंपानियों और बड़े पूंजीपतियों को आसन रास्ता मिल जायेगा भारत पे राज करने का | वो कैसे ? उन्हें केवल 11 लोकपालों को रिश्वत देनी पड़ेगी,और वे सभी  मंत्रियों,आईएएस अधिकारियों,न्यायाधीशों को नियंत्रित कर पाएंगे | अभी बहुराष्ट्रीय कंपानियों और बड़े पूंजीपतियों को पूरे भारत में लगभग 14000 आईएएस,आईपीएस,न्यायाधीश,विधायक,सांसद,मंत्रियों को रिश्वत देनी पड़ती है | अगर हम बिना निकालने के अधिकार (Right to Recall Lokpal) के लोकपालों को बना देते हैं,तो ये भारत को चांदी की थाली में रख के बहुराष्ट्रीय कंपानियों और बड़े पूंजीपतियों को दे देने के बराबर होगा ! जबकि अगर लोकपाल को निकलने के अधिकार देने वाले प्रावधानों के साथ यह पद बनता है तो सही में भ्रष्टाचार के खिलाफ कारगर कानून सिद्ध होगा |

 

2. निकालने के अधिकार (Right to Recall) के बारे में ज्यादा जानें

 

अमेरिका के पुलिसकर्मियों में भ्रष्टाचार कम क्यों है (नशीली दवाओं के कांडों को छोड़ के) ? एक और केवल एक कारण ये है अमेरिकी पुलिसकर्मियों में भ्रष्टाचार कम होने का की अमरीकी नागरिकों के पास वो प्रक्रिया है जिस से वे अपने अपने जिला पुलिस आयुक्त (District Police Commissioner) को निष्कासित कर सकते हैं | इसीलिए अमेरिका में पुलिस कमिश्नर बहुत कम रिश्वत लेता है और ये भी सुनिश्चित करता है की उसके कर्मचारी ज्यादा रिश्वत न लें | अगर किसी अमेरिका के पुलिस कमिश्नर को पता चले की उसके कनिष्ठ कर्मचारी रिश्वत लेता है,तो वो तुरंत स्टिंग ऑपरेशन करके सबूत इकट्ठे करता है और उस कर्मचारी को निष्कासित कर देता है | क्योंकि उसे डर है की अगर उसके नीचे काम करने वाले स्टाफ में अगर रिश्वतखोरी बढ़ जाएगी तो नागरिक उसे नौकरी से निकाल देंगे |

 

अमेरिकी पुलिस में नशीली दवाओं के मामलों में भ्रष्टाचार कम है क्योंकि वहां ज्यादातर लोगों को नशा करने से ज्यादा घृणा नहीं है | लेकिन क्योंकि भारत में नागरिकों के पास  पुलिस मुखिया को निष्कासित करने के लिए कोई प्रणाली नहीं है,कमिश्नर जैसे पदों पर बैठे पुलिस अधिकारी ना केवल खुद रिश्वत लेते हैं,बल्कि अपने से नीचे काम करने वालों को ज्यादा से ज्यादा घूस कमाने के लिए राजी रहते हैं |

 

 

इसी तरह अमेरिका में अदालतों के फैसले 3 से 6 महीनों में आ जाते हैं ! ऐसा क्यों ? क्योंकि अमेरिका में नागरिकों के पास निष्कासित करने की लोकतान्त्रिक प्रक्रियाएं है,जैसे की उच्च न्यायाधीश को निकालने का अधिकार (Right to Recall High Court judges), निचले न्यायालय के न्यायाधीशों,लोक अभियोजन पक्ष अधिकारीयों (Public Prosecutors) ,आदि को निकालने का अधिकार | इसी तरह शिक्षा में भी अमेरिका में भ्रष्टाचार कम है क्योंकि नागरिकों के पास जिला शिक्षा अधिकारी को निकालने का अधिकार (Right to Recall District Education Officer) है | और अमेरिका के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर भी भारत के सरकारी स्कूलों से बहुत अच्छा है |

 

अब हम जनलोकपाल पे ध्यान केन्द्रित करते हैं | हमें भ्रष्टाचार को कम करने के लिए जनलोकपाल की जरुरत है | लेकिन अगर लोकपाल को निकालने का अधिकार (Right to Recall Lokpal) इसमें नहीं है तो लोकपाल भी भ्रष्ट हो जायेगा | इसीलिए अन्ना जी के जनलोकपाल का समर्थन लोकपाल को निकालने का अधिकार (Right to Recall Lokpal) के प्रावधानों के साथ करें | अगर आप वैसे प्रावधानों के बारे में जानना चाहते हैं जिंनसे लोकपाल को निकालने का अधिकार (Right to Recall Lokpal) की प्रक्रिया नागरिकों को मिलेगी तो कृपया

 

http://rahulmehta.com/lokpal.pdf. को देखें |

 

कृपया जनलोकपाल का समर्थन भ्रष्ट लोकपाल को निकालने के अधिकार [Right to Recall (Corrupt) Lokpal ] के प्रावधानों  के साथ ही करें!

 

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